शादीशुदा होकर भी पवित्र और कुंवारी मानी गई हैं ये 5 स्त्रियां.. वजह जानकर आपको भी होगी हैरानी

आज हम आपको कुछ ऐसी स्त्रियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो शादीशुदा होकर भी पवित्र मानी जाती है। रामायण और महाभारत काल में कुछ स्त्रियों का वर्णन किया गया है यह स्त्रिया के विवाहित जीवन में भोगा था इसके बाद भी ने कुंवारी माना गया है। 

अब आपके मन में भी है प्रश्न उठा होगा कि आखिर क्यों कुंवारी माना जाता है आइए जानते हैं उन स्त्रियों के बारे में जिनको कुंवारी माना जाता है। ये बात हैरान करने वाली तो है लेकिन सच्च है।
दोस्तों आगे आपको पूरी खबर बताने से पहले आपको  बता दे की - हमारा एक MIND QUIZ है , इस सवाल का सही जवाब देने वाले जीत सकते है Amazing gifts TLS News की 
 तरफ से ,तो दोस्तों आपको बताना है की - महाभारत मैं द्रौपदी कौन थी ?
आप अपना जवाब हमें कमेंट बॉक्स मैं लिख सकते है -सही जवाब देने वाले जीत सकते है Amazing Gifts TLS News की तरफ से ,धन्यवाद् अब चलते है खबर की ओर आपको बता दे की  

अहिल्या
यह गौतम की पत्नी थी और वह अत्यंत सुंदर थी वह इतनी सुंदर थी के इंद्रदेव ने गौतम का रूप लेकर उनके साथ समय बिताया था इस क्रोध में आकर ऋषि गौतम ने पत्थर बनने का श्राप दे दिया लेकिन वह अपने पति ऋषि गौतम के प्रति बहुत ईमानदार थी इस वजह से उन्होंने उनका श्राप स्वीकार कर लिया और उन्होंने पत्थर बनकर गुजारा किया परंतु जब ऋषि का गुस्सा शांत हुआ और उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ तो उन्होंने इस श्राप  से छुटकारा पाने का बताया कि वह श्रीराम के चरणो को छू कर मुक्त हो जाएगी इसके बाद श्री राम ने उन्हें पवित्र कहा और वह मुक्त हो गई इस कारण से उन्हें कुवारी माना जाता है।

तारा
तारा का जन्म समुद्र मंथन के दौरान हुआ था तारा सुग्रीव के भाई बाली की पत्नी थी भगवान विष्णु ने तारा का हाथ बाली को दे दिया था वह इतनी बुद्धिमान थी कि वह प्राणियों की भाषा समझ सकती थी एक बार बाली असुरों से युद्ध करने के लिए चले गए थे और लोट कर नही आए तो सभी ने उन्हें मरा हुआ समझ लिया इसके बाद सुग्रीव ने उस राज्य को और तारा को अपने अधीन ले लिया परंतु एक दिन बाली लौटाया और उन्होंने वह राज्य ले लिया।

सुग्रीव को राज्य से बाहर निकाल दिया जब सुग्रीव  श्री राम जी की शरण में चले गए तो तारा समझ गई थी सुग्रीव अकेला नहीं है। उसने बाली को समझाने की कोशिश की लेकिन बाली गुस्से में था तो तारा को छोड़कर चले गया फिर श्री राम जी ने बाली का वध कर दिया लेकिन मरते हुए बाली ने  सुग्रीव से कहा तारा के विचार को सम्मान देने के लिए क्योंकि हर पत्नी अपने पति की भलाई चाहती है इस तारा को पवित्र माना जाता है।

मंदोदरी
मंदोदरी अदभुत सोंदर्य वाली स्त्री थी और बहुत बुद्धिमान थी इनका विवाह रावण के साथ हुआ था। कहते हैं कि मंदोदरी रावण को सही गलत का राह दिखाती थी लेकिन रावण उस बात को मानता नहीं था। रावण की मृत्यु के बाद श्री राम ने विभीषण को मंदोदरी को आश्रय देने के लिए कहा अपने इन गुणों के कारण मंदोदरी कुंवारी मानी जाती है।

द्रौपदी
पांच पतियों की पत्नी होने पर भी द्रौपदी का व्यक्तित्व काफी मजबूत था परन्तु इसके बावजूद उन्हें कुंवारी कन्याओं की श्रेणी में माना जाता है। जीवनभर द्रौपदी ने पांचों पांडवों का हर परिस्थिति में साथ दिया और कभी किसी एक पति के साथ रहने की जिद्द नहीं की। अपने कर्तव्यों का पालन ईमानदारी से निभाने वाली द्रौपदी का स्मरण धर्म ग्रंथों में महापाप को नाश करने वाला माना गया है।

कुंती
हस्तिनापुर के राजा पांडु की पत्नी कुंती ने शादी से पहले ऋषि दुर्वासा के मंत्र से सूर्य का ध्यान करके पुत्र की प्राप्ती की। शादी के बाद पांडु की मौत के बाद कुंती ने वंश खत्म नहीं हो जाए इसलिए उसी मंत्र का दोबारा इस्तेमाल करके अलग-अलग देवताओं से संतान पाप्ती की, जिसके कारण उन्हें कौमार्या माना गया है।

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